गर्भाधानसे लेकर अन्त्येष्टितक सब संस्कारोंको विधिपूर्वक करनेवाले ये सकामकर्मी सूर्यसे दक्षिण ओरके पितृयान या धूममार्गसे पित्रीश्वर अर्यमाके लोकमें जाते हैं और फिर अपनी ही सन्ततिके वंशमें उत्पन्न होते हैं॥ २०॥
दक्षिणेन पथार्यम्णः पितृलोकं व्रजन्ति ते।
प्रजामनु प्रजायन्ते श्मशानान्तक्रियाकृतः॥ २०
गर्भाधानसे लेकर अन्त्येष्टितक सब संस्कारोंको विधिपूर्वक करनेवाले ये सकामकर्मी सूर्यसे दक्षिण ओरके पितृयान या धूममार्गसे पित्रीश्वर अर्यमाके लोकमें जाते हैं और फिर अपनी ही सन्ततिके वंशमें उत्पन्न होते हैं॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.32.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 397) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/32/20/