॥ श्रीहरिः ॥
एतन्निगदितं तात यत्पृष्टोऽहं तवानघ३।
कपिलस्य च संवादो देवहूत्याश्च पावनः॥ ३६
etannigaditaṃ tāta yatpṛṣṭo'haṃ tavānagha|
kapilasya ca saṃvādo devahūtyāśca pāvanaḥ|| 36
अर्थ
निष्पाप विदुरजी! तुम्हारे पूछनेसे मैंने तुम्हें यह भगवान् कपिल और देवहूतिका परम पवित्र संवाद सुनाया॥ ३६॥
एतन्निगदितं तात यत्पृष्टोऽहं तवानघ।
कपिलस्य च संवादो देवहूत्याश्च पावनः॥ ३६
निष्पाप विदुरजी! तुम्हारे पूछनेसे मैंने तुम्हें यह भगवान् कपिल और देवहूतिका परम पवित्र संवाद सुनाया॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.33.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 404) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/33/36/टिप्पणियाँ
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प्रा० पा०—त्वया०।
(मुद्रित पृष्ठ 404)