श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.4.1

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

अथ चतुर्थोऽध्यायः

उद्धवजीसे विदा होकर विदुरजीका मैत्रेय ऋषिके पास जाना

उद्धव उवाच

अथ ते तदनुज्ञाता भुक्‍त्वा पीत्वा च वारुणीम्।

तया विभ्रंशितज्ञाना दुरुक्तैर्मर्म पस्पृशुः॥ १

atha te tadanujñātā bhuktvā pītvā ca vāruṇīm|

tayā vibhraṃśitajñānā duruktairmarma paspṛśuḥ|| 1

अर्थ

उद्धवजीने कहा—फिर ब्राह्मणोंकी आज्ञा पाकर यादवोंने भोजन किया और वारुणी मदिरा पी। उससे उनका ज्ञान नष्ट हो गया और वे दुर्वचनोंसे एक-दूसरेके हृदयको चोट पहुँचाने लगे॥ १॥

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