उद्धवजीसे विदा होकर विदुरजीका मैत्रेय ऋषिके पास जाना
उद्धव उवाच
अथ ते तदनुज्ञाता भुक्त्वा पीत्वा च वारुणीम्।
तया विभ्रंशितज्ञाना दुरुक्तैर्मर्म पस्पृशुः॥ १
atha te tadanujñātā bhuktvā pītvā ca vāruṇīm|
tayā vibhraṃśitajñānā duruktairmarma paspṛśuḥ|| 1
अर्थ
उद्धवजीने कहा—फिर ब्राह्मणोंकी आज्ञा पाकर यादवोंने भोजन किया और वारुणी मदिरा पी। उससे उनका ज्ञान नष्ट हो गया और वे दुर्वचनोंसे एक-दूसरेके हृदयको चोट पहुँचाने लगे॥ १॥
अथ ते तदनुज्ञाता भुक्त्वा पीत्वा च वारुणीम्।
तया विभ्रंशितज्ञाना दुरुक्तैर्मर्म पस्पृशुः॥ १
उद्धवजीने कहा—फिर ब्राह्मणोंकी आज्ञा पाकर यादवोंने भोजन किया और वारुणी मदिरा पी। उससे उनका ज्ञान नष्ट हो गया और वे दुर्वचनोंसे एक-दूसरेके हृदयको चोट पहुँचाने लगे॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.4.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 249) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/4/1/