श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.4.2

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

तेषां मैरेयदोषेण विषमीकृतचेतसाम्।

निम्लोचति रवावासीद्वेणूनामिव मर्दनम्॥ २

teṣāṃ maireyadoṣeṇa viṣamīkṛtacetasām|

nimlocati ravāvāsīdveṇūnāmiva mardanam|| 2

अर्थ

मदिराके नशेसे उनकी बुद्धि बिगड़ गयी और जैसे आपसकी रगड़से बाँसोंमें आग लग जाती है, उसी प्रकार सूर्यास्त होते-होते उनमें मार-काट होने लगी॥ २॥

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