मदिराके नशेसे उनकी बुद्धि बिगड़ गयी और जैसे आपसकी रगड़से बाँसोंमें आग लग जाती है, उसी प्रकार सूर्यास्त होते-होते उनमें मार-काट होने लगी॥ २॥
तेषां मैरेयदोषेण विषमीकृतचेतसाम्।
निम्लोचति रवावासीद्वेणूनामिव मर्दनम्॥ २
मदिराके नशेसे उनकी बुद्धि बिगड़ गयी और जैसे आपसकी रगड़से बाँसोंमें आग लग जाती है, उसी प्रकार सूर्यास्त होते-होते उनमें मार-काट होने लगी॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.4.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 249) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/4/2/