जब मैंने इस प्रकार अपने हृदयका भाव निवेदित किया, तब परमपुरुष कमलनयन भगवान् श्रीकृष्णने मुझे अपने स्वरूपकी परम स्थितिका उपदेश दिया॥ १९॥
इत्यावेदितहार्दाय मह्यं स भगवान् परः।
आदिदेशारविन्दाक्ष आत्मनः परमां स्थितिम्॥ १९
जब मैंने इस प्रकार अपने हृदयका भाव निवेदित किया, तब परमपुरुष कमलनयन भगवान् श्रीकृष्णने मुझे अपने स्वरूपकी परम स्थितिका उपदेश दिया॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.4.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 251) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/4/19/