श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.4.19

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

इत्यावेदितहार्दाय मह्यं स भगवान् परः।

आदिदेशारविन्दाक्ष आत्मनः परमां स्थितिम्॥ १९

ityāveditahārdāya mahyaṃ sa bhagavān paraḥ|

ādideśāravindākṣa ātmanaḥ paramāṃ sthitim|| 19

अर्थ

जब मैंने इस प्रकार अपने हृदयका भाव निवेदित किया, तब परमपुरुष कमलनयन भगवान् श्रीकृष्णने मुझे अपने स्वरूपकी परम स्थितिका उपदेश दिया॥ १९॥

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