इसलिये अब मैं जगत्की उत्पत्ति, स्थिति और लयके लिये योगमायाके द्वारा विस्तारित हुई भगवान्की विभिन्न लीलाओंका क्रमशः वर्णन करता हूँ॥ २२॥✎ 210211
अथ ते भगवल्लीला योगमायोपबृंहिताः।
विश्वस्थित्युद्भवान्तार्था वर्णयाम्यनुपूर्वशः॥ २२
इसलिये अब मैं जगत्की उत्पत्ति, स्थिति और लयके लिये योगमायाके द्वारा विस्तारित हुई भगवान्की विभिन्न लीलाओंका क्रमशः वर्णन करता हूँ॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.5.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 255) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/5/22/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)