फिर चिदाभास, गुण और कालके अधीन उस महत्तत्त्वने भगवान्की दृष्टि पड़नेपर इस विश्वकी रचनाके लिये अपना रूपान्तर किया॥ २८॥✎ 212213214
सोऽप्यंशगुणकालात्मा भगवद्दृष्टिगोचरः।
आत्मानं व्यकरोदात्मा विश्वस्यास्य सिसृक्षया॥ २८
फिर चिदाभास, गुण और कालके अधीन उस महत्तत्त्वने भगवान्की दृष्टि पड़नेपर इस विश्वकी रचनाके लिये अपना रूपान्तर किया॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.5.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 256) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/5/28/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)