महत्तत्त्वके विकृत होनेपर अहंकारकी उत्पत्ति हुई—जो कार्य (अधिभूत), कारण (अध्यात्म) और कर्ता (अधिदैव) रूप होनेके कारण भूत, इन्द्रिय और मनका कारण है॥ २९॥✎ 212213214
महत्तत्त्वाद्विकुर्वाणादहंतत्त्वं व्यजायत।
कार्यकारणकर्त्रात्मा भूतेन्द्रियमनोमयः॥ २९
महत्तत्त्वके विकृत होनेपर अहंकारकी उत्पत्ति हुई—जो कार्य (अधिभूत), कारण (अध्यात्म) और कर्ता (अधिदैव) रूप होनेके कारण भूत, इन्द्रिय और मनका कारण है॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.5.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 256) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/5/29/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)