तैजस अहंकारसे ज्ञानेन्द्रियाँ और कर्मेन्द्रियाँ हुईं तथा तामस अहंकारसे सूक्ष्म भूतोंका कारण शब्द-तन्मात्र हुआ और उससे दृष्टान्तरूपसे आत्माका बोध करानेवाला आकाश उत्पन्न हुआ॥ ३१॥✎ 212213214
तैजसानीन्द्रियाण्येव ज्ञानकर्ममयानि च।
तामसो भूतसूक्ष्मादिर्यतः खं लिङ्गमात्मनः॥ ३१
तैजस अहंकारसे ज्ञानेन्द्रियाँ और कर्मेन्द्रियाँ हुईं तथा तामस अहंकारसे सूक्ष्म भूतोंका कारण शब्द-तन्मात्र हुआ और उससे दृष्टान्तरूपसे आत्माका बोध करानेवाला आकाश उत्पन्न हुआ॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.5.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 256) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/5/31/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)