श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.5.50

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

ततो वयं सत्प्रमुखा यदर्थे

बभूविमात्मन् करवाम किं ते।

त्वं नः स्वचक्षुः परिदेहि शक्‍त्या

देव क्रियार्थे यदनुग्रहाणाम्॥ ५०

tato vayaṃ satpramukhā yadarthe

babhūvimātman karavāma kiṃ te|

tvaṃ naḥ svacakṣuḥ paridehi śaktyā

deva kriyārthe yadanugrahāṇām|| 50

अर्थ

परमात्मदेव! महत्तत्त्वादिरूप हम देवगण जिस कार्यके लिये उत्पन्‍न हुए हैं, उसके सम्बन्धमें हम क्या करें? देव! हमपर आप ही अनुग्रह करनेवाले हैं। इसलिये ब्रह्माण्डरचनाके लिये आप हमें क्रियाशक्तिके सहित अपनी ज्ञानशक्ति भी प्रदान कीजिये॥ ५०॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां तृतीयस्कन्धे पञ्चमोऽध्यायः॥ ५॥

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