उन विराट्के हजारों पैर, जाँघें और बाँहें हैं; उन्हींको वेद आदिपुरुष कहते हैं; उन्हींमें ये सब लोक विस्तृतरूपसे स्थित हैं॥ २२॥✎ 231
यमाहुराद्यं पुरुषं सहस्राङ्घ्र्यूरुबाहुकम्।
यत्र विश्व इमे लोकाः सविकाशं समासते॥ २२
उन विराट्के हजारों पैर, जाँघें और बाँहें हैं; उन्हींको वेद आदिपुरुष कहते हैं; उन्हींमें ये सब लोक विस्तृतरूपसे स्थित हैं॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.7.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 265) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/7/22/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)