श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.7.23

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

यस्मिन् दशविधः प्राणः सेन्द्रियार्थेन्द्रियस्त्रिवृत्।

त्वयेरितो यतो वर्णास्तद्विभूतीर्वदस्व नः॥ २३

yasmin daśavidhaḥ prāṇaḥ sendriyārthendriyastrivṛt|

tvayerito yato varṇāstadvibhūtīrvadasva naḥ|| 23

अर्थ

उन्हींमें इन्द्रिय, विषय और इन्द्रियाभिमानी देवताओंके सहित दस प्रकारके प्राणोंका—जो इन्द्रियबल, मनोबल और शारीरिक बलरूपसे तीन प्रकारके हैं—आपने वर्णन किया है और उन्हींसे ब्राह्मणादि वर्ण भी उत्पन्‍न हुए हैं। अब आप मुझे उनकी ब्रह्मादि विभूतियोंका वर्णन सुनाइये—जिनसे पुत्र, पौत्र, नाती और कुटुम्बियोंके सहित तरह-तरहकी प्रजा उत्पन्‍न हुई और उससे यह सारा ब्रह्माण्ड भर गया॥ २३-२४॥✎ 231

यह अर्थ श्लोक 23–24 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #231 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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