॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.7.26
एतेषामपि वंशांश्च वंशानुचरितानि च।
उपर्यधश्च ये लोका भूमेर्मित्रात्मजासते॥ २६
eteṣāmapi vaṃśāṃśca vaṃśānucaritāni ca|
uparyadhaśca ye lokā bhūmermitrātmajāsate|| 26
अर्थ
मैत्रेयजी! उन मनुओंके वंश और वंशधर राजाओंके चरित्रोंका, पृथ्वीके ऊपर और नीचेके लोकों तथा भूर्लोकके विस्तार और स्थितिका भी वर्णन कीजिये तथा यह भी बताइये कि तिर्यक्, मनुष्य, देवता, सरीसृप (सर्पादि रेंगनेवाले जन्तु ) और पक्षी तथा जरायुज, स्वेदज, अण्डज और उद्भिज्ज—ये चार प्रकारके प्राणी किस प्रकार उत्पन्न हुए ॥ २६-२७॥✎ 231