श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.8.19

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

स इत्थमुद्वीक्ष्य तदब्जनाल-

नाडीभिरन्तर्जलमाविवेश ।

नार्वाग्गतस्तत्खरनालनाल-

नाभिं विचिन्वंस्तदविन्दताजः॥ १९

sa itthamudvīkṣya tadabjanāla-

nāḍībhirantarjalamāviveśa |

nārvāggatastatkharanālanāla-

nābhiṃ vicinvaṃstadavindatājaḥ|| 19

अर्थ

ऐसा सोचकर वे उस कमलकी नालके सूक्ष्म छिद्रोंमें होकर उस जलमें घुसे। किन्तु उस नालके आधारको खोजते-खोजते नाभि-देशके समीप पहुँच जानेपर भी वे उसे पा न सके॥ १९॥

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