श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.8.9

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

प्रोवाच मह्यं स दयालुरुक्तो

मुनिः पुलस्त्येन पुराणमाद्यम्।

सोऽहं तवैतत्कथयामि वत्स

श्रद्धालवे नित्यमनुव्रताय॥ ९

provāca mahyaṃ sa dayālurukto

muniḥ pulastyena purāṇamādyam|

so'haṃ tavaitatkathayāmi vatsa

śraddhālave nityamanuvratāya|| 9

अर्थ

इसके पश्चात् परम दयालु पराशरजीने पुलस्त्य मुनिके कहनेसे वह आदिपुराण मुझसे कहा। वत्स! श्रद्धालु और सदा अनुगत देखकर अब वही पुराण मैं तुम्हें सुनाता हूँ॥ ९॥✎ 233

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #233 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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