॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.9.19
तिर्यङ्मनुष्यविबुधादिषु जीवयोनि-
ष्वात्मेच्छयाऽऽत्मकृतसेतुपरीप्सया यः।
रेमे निरस्तरतिरप्यवरुद्धदेह-
स्तस्मै नमो भगवते पुरुषोत्तमाय॥ १९
tiryaṅmanuṣyavibudhādiṣu jīvayoni-
ṣvātmecchayā''tmakṛtasetuparīpsayā yaḥ|
reme nirastaratirapyavaruddhadeha-
stasmai namo bhagavate puruṣottamāya|| 19
अर्थ
आप पूर्णकाम हैं, आपको किसी विषयसुखकी इच्छा नहीं है, तो भी आपने अपनी बनायी हुई धर्ममर्यादाकी रक्षाके लिये पशु-पक्षी, मनुष्य और देवता आदि जीवयोनियोंमें अपनी ही इच्छासे शरीर धारण कर अनेकों लीलाएँ की हैं। ऐसे आप पुरुषोत्तमभगवान्को मेरा नमस्कार है॥ १९॥✎ 238