आप सम्पूर्ण जगत्के एकमात्र सुहृद् और आत्मा हैं तथा शरणागतोंपर कृपा करनेवाले हैं। अतः अपने जिस ज्ञान और ऐश्वर्यसे आप विश्वको आनन्दित करते हैं, उसीसे मेरी बुद्धिको भी युक्त करें—जिससे मैं पूर्वकल्पके समान इस समय भी जगत्की रचना कर सकूँ॥ २२॥✎ 238
सोऽयं समस्तजगतां सुहृदेक आत्मा
सत्त्वेन यन्मृडयते भगवान् भगेन।
तेनैव मे दृशमनुस्पृशताद्यथाहं
स्रक्ष्यामि पूर्ववदिदं प्रणतप्रियोऽसौ॥ २२
आप सम्पूर्ण जगत्के एकमात्र सुहृद् और आत्मा हैं तथा शरणागतोंपर कृपा करनेवाले हैं। अतः अपने जिस ज्ञान और ऐश्वर्यसे आप विश्वको आनन्दित करते हैं, उसीसे मेरी बुद्धिको भी युक्त करें—जिससे मैं पूर्वकल्पके समान इस समय भी जगत्की रचना कर सकूँ॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.9.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 275) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/9/22/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#238 शब्दोंके बीचका स्थान: पुरुषोत्तमभगवान् को → पुरुषोत्तमभगवान्को