श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.9.23

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

एष प्रपन्‍नवरदो रमयाऽऽत्मशक्‍त्या

यद्यत्करिष्यति गृहीतगुणावतारः।

तस्मिन् स्वविक्रममिदं सृजतोऽपि चेतो

युञ्जीत कर्मशमलं च यथा विजह्याम्॥ २३

eṣa prapannavarado ramayā''tmaśaktyā

yadyatkariṣyati gṛhītaguṇāvatāraḥ|

tasmin svavikramamidaṃ sṛjato'pi ceto

yuñjīta karmaśamalaṃ ca yathā vijahyām|| 23

अर्थ

आप भक्तवांछाकल्पतरु हैं। अपनी शक्ति लक्ष्मीजीके सहित अनेकों गुणावतार लेकर आप जो-जो अद्भुत कर्म करेंगे, मेरा यह जगत‍्की रचना करनेका उद्यम भी उन्हींमेंसे एक है। अतः इसे रचते समय आप मेरे चित्तको प्रेरित करें—शक्ति प्रदान करें, जिससे मैं सृष्टिरचनाविषयक अभिमानरूप मलसे दूर रह सकूँ॥ २३॥

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