श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.9.24

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

नाभिह्रदादिह सतोऽम्भसि यस्य पुंसो

विज्ञानशक्तिरहमासमनन्तशक्तेः।

रूपं विचित्रमिदमस्य विवृण्वतो मे

मा रीरिषीष्ट निगमस्य गिरां विसर्गः॥ २४

nābhihradādiha sato'mbhasi yasya puṃso

vijñānaśaktirahamāsamanantaśakteḥ|

rūpaṃ vicitramidamasya vivṛṇvato me

mā rīriṣīṣṭa nigamasya girāṃ visargaḥ|| 24

अर्थ

प्रभो! इस प्रलयकालीन जलमें शयन करते हुए आप अनन्तशक्ति परमपुरुषके नाभिकमलसे मेरा प्रादुर्भाव हुआ है और मैं हूँ भी आपकी ही विज्ञानशक्ति; अतः इस जगत‍्के विचित्र रूपका विस्तार करते समय आपकी कृपासे मेरी वेदरूप वाणीका उच्चारण लुप्त न हो॥ २४॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें