श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.9.25

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

सोऽसावदभ्रकरुणो भगवान् विवृद्ध-

प्रेमस्मितेन नयनाम्बुरुहं विजृम्भन्।

उत्थाय विश्‍वविजयाय च नो विषादं

माध्व्या गिरापनयतात्पुरुषः पुराणः॥ २५

so'sāvadabhrakaruṇo bhagavān vivṛddha-

premasmitena nayanāmburuhaṃ vijṛmbhan|

utthāya viśvavijayāya ca no viṣādaṃ

mādhvyā girāpanayatātpuruṣaḥ purāṇaḥ|| 25

अर्थ

आप अपार करुणामय पुराणपुरुष हैं। आप परम प्रेममयी मुसकानके सहित अपने नेत्रकमल खोलिये और शेषशय्यासे उठकर विश्‍वके उद्भवके लिये अपनी सुमधुर वाणीसे मेरा विषाद दूर कीजिये॥ २५॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें