तुम एक बार फिर तप करो और भागवत-ज्ञानका अनुष्ठान करो। उनके द्वारा तुम सब लोकोंको स्पष्टतया अपने अन्तःकरणमें देखोगे॥ ३०॥✎ 241
भूयस्त्वं तप आतिष्ठ विद्यां चैव मदाश्रयाम्।
ताभ्यामन्तर्हृदि ब्रह्मन् लोकान्द्रक्ष्यस्यपावृतान्॥ ३०
तुम एक बार फिर तप करो और भागवत-ज्ञानका अनुष्ठान करो। उनके द्वारा तुम सब लोकोंको स्पष्टतया अपने अन्तःकरणमें देखोगे॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.9.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 276) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/9/30/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#241 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने