श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.1.12

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

याः कर्दमसुताः प्रोक्ता नव२ ब्रह्मर्षिपत्नयः।

तासां प्रसूतिप्रसवं प्रोच्यमानं निबोध मे॥ १२

yāḥ kardamasutāḥ proktā nava brahmarṣipatnayaḥ|

tāsāṃ prasūtiprasavaṃ procyamānaṃ nibodha me|| 12

अर्थ

मैं कर्दमजीकी नौ कन्याओंका, जो नौ ब्रह्मर्षियोंसे ब्याही गयी थीं, पहले ही वर्णन कर चुका हूँ। अब उनकी वंशपरम्पराका वर्णन करता हूँ, सुनो॥ १२॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    प्रा० पा०—क्ताःक्षत्तर्ब्रह्म०।

    (मुद्रित पृष्ठ 406)

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें