अत्रिकी पत्नी अनसूयासे दत्तात्रेय, दुर्वासा और चन्द्रमा नामके तीन परम यशस्वी पुत्र हुए। ये क्रमशः भगवान् विष्णु, शंकर और ब्रह्माके अंशसे उत्पन्न हुए थे॥ १५॥
अत्रेः पत्न्यनसूया त्रीञ्जज्ञे सुयशसः सुतान्।
दत्तं दुर्वाससं सोममात्मेशब्रह्मसम्भवान्॥ १५
अत्रिकी पत्नी अनसूयासे दत्तात्रेय, दुर्वासा और चन्द्रमा नामके तीन परम यशस्वी पुत्र हुए। ये क्रमशः भगवान् विष्णु, शंकर और ब्रह्माके अंशसे उत्पन्न हुए थे॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.1.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 406) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/1/15/