श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.1.29

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

मैत्रेय उवाच

इति तस्य वचः श्रुत्वा त्रयस्ते विबुधर्षभाः।

प्रत्याहुः श्लक्ष्णया वाचा प्रहस्य तमृषिं प्रभो॥ २९

iti tasya vacaḥ śrutvā trayaste vibudharṣabhāḥ|

pratyāhuḥ ślakṣṇayā vācā prahasya tamṛṣiṃ prabho|| 29

अर्थ

श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—समर्थ विदुरजी! अत्रि मुनिके वचन सुनकर वे तीनों देव हँसे और उनसे सुमधुर वाणीमें कहने लगे॥ २९॥

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