॥ श्रीहरिः ॥
ऊर्जायां जज्ञिरे पुत्रा वसिष्ठस्य परंतप।
चित्रकेतुप्रधानास्ते सप्त ब्रह्मर्षयोऽमलाः॥ ४०
ūrjāyāṃ jajñire putrā vasiṣṭhasya paraṃtapa|
citraketupradhānāste sapta brahmarṣayo'malāḥ|| 40
अर्थ
शत्रुतापन विदुरजी! वसिष्ठजीकी पत्नी ऊर्जा (अरुन्धती)-से चित्रकेतु आदि सात विशुद्धचित्त ब्रह्मर्षियोंका जन्म हुआ॥ ४०॥
ऊर्जायां जज्ञिरे पुत्रा वसिष्ठस्य परंतप।
चित्रकेतुप्रधानास्ते सप्त ब्रह्मर्षयोऽमलाः॥ ४०
शत्रुतापन विदुरजी! वसिष्ठजीकी पत्नी ऊर्जा (अरुन्धती)-से चित्रकेतु आदि सात विशुद्धचित्त ब्रह्मर्षियोंका जन्म हुआ॥ ४०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.1.40 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 409) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/1/40/