॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.1.41
चित्रकेतुः सुरोचिश्च विरजा मित्र एव च।
उल्बणो वसुभृद्यानो द्युमान् शक्त्यादयोऽपरे॥ ४१
citraketuḥ surociśca virajā mitra eva ca|
ulbaṇo vasubhṛdyāno dyumān śaktyādayo'pare|| 41
अर्थ
उनके नाम चित्रकेतु, सुरोचि, विरजा, मित्र, उल्बण, वसुभृद्यान और द्युमान् थे। इनके सिवा उनकी दूसरी पत्नीसे शक्ति आदि और भी कई पुत्र हुए॥ ४१॥