उनमेंसे मृकण्डके मार्कण्डेय और प्राणके मुनिवर वेदशिराका जन्म हुआ। भृगुजीके एक कवि नामक पुत्र भी थे। उनके भगवान् उशना (शुक्राचार्य) हुए॥ ४५॥
मार्कण्डेयो मृकण्डस्य प्राणाद्वेदशिरा मुनिः।
कविश्च भार्गवो यस्य भगवानुशना सुतः॥ ४५
उनमेंसे मृकण्डके मार्कण्डेय और प्राणके मुनिवर वेदशिराका जन्म हुआ। भृगुजीके एक कवि नामक पुत्र भी थे। उनके भगवान् उशना (शुक्राचार्य) हुए॥ ४५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.1.45 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 409) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/1/45/