मेरुऋषिने अपनी आयति और नियति नामकी कन्याएँ क्रमशः धाता और विधाताको ब्याहीं; उनसे उनके मृकण्ड और प्राण नामक पुत्र हुए॥ ४४॥
आयतिं नियतिं चैव सुते मेरुस्तयोरदात्।
ताभ्यां तयोरभवतां मृकण्डः प्राण एव च॥ ४४
मेरुऋषिने अपनी आयति और नियति नामकी कन्याएँ क्रमशः धाता और विधाताको ब्याहीं; उनसे उनके मृकण्ड और प्राण नामक पुत्र हुए॥ ४४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.1.44 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 409) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/1/44/