श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.1.43

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

भृगुः ख्यात्यां महाभागः पत्न्यां पुत्रानजीजनत्।

धातारं च विधातारं श्रियं च भगवत्पराम्॥ ४३

bhṛguḥ khyātyāṃ mahābhāgaḥ patnyāṃ putrānajījanat|

dhātāraṃ ca vidhātāraṃ śriyaṃ ca bhagavatparām|| 43

अर्थ

महाभाग भृगुजीने अपनी भार्या ख्यातिसे धाता और विधाता नामक पुत्र तथा श्री नामकी एक भगवत्परायणा कन्या उत्पन्‍न की॥ ४३॥

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