श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.1.52

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

मूर्तिः सर्वगुणोत्पत्तिर्नरनारायणावृषी॥ ५२

mūrtiḥ sarvaguṇotpattirnaranārāyaṇāvṛṣī|| 52

अर्थ

समस्त गुणोंकी खान मूर्तिदेवीने नर-नारायण ऋषियोंको जन्म दिया॥ ५२॥✎ 356

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #356 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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