॥ श्रीहरिः ॥
अग्निष्वात्ता बर्हिषदः सोम्याः पितर आज्यपाः।
साग्नयोऽनग्नयस्तेषां पत्नी दाक्षायणी स्वधा॥ ६३
agniṣvāttā barhiṣadaḥ somyāḥ pitara ājyapāḥ|
sāgnayo'nagnayasteṣāṃ patnī dākṣāyaṇī svadhā|| 63
अर्थ
अग्निष्वात्त, बर्हिषद्, सोमप और आज्यप—ये पितर हैं; इनमें साग्निक भी हैं और निरग्निक भी। इन सब पितरोंकी पत्नी दक्षकुमारी स्वधा हैं॥ ६३॥
अग्निष्वात्ता बर्हिषदः सोम्याः पितर आज्यपाः।
साग्नयोऽनग्नयस्तेषां पत्नी दाक्षायणी स्वधा॥ ६३
अग्निष्वात्त, बर्हिषद्, सोमप और आज्यप—ये पितर हैं; इनमें साग्निक भी हैं और निरग्निक भी। इन सब पितरोंकी पत्नी दक्षकुमारी स्वधा हैं॥ ६३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.1.63 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 411) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/1/63/