श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.1.8

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

तुषिता नाम ते देवा आसन् स्वायम्भुवान्तरे।

मरीचिमिश्रा ऋषयो यज्ञः सुरगणेश्‍वरः॥ ८

tuṣitā nāma te devā āsan svāyambhuvāntare|

marīcimiśrā ṛṣayo yajñaḥ suragaṇeśvaraḥ|| 8

अर्थ

ये ही स्वायम्भुव मन्वन्तरमें ‘तुषित’ नामके देवता हुए। उस मन्वन्तरमें मरीचि आदि सप्तर्षि थे, भगवान् यज्ञ ही देवताओंके अधीश्‍वर इन्द्र थे और महान् प्रभावशाली प्रियव्रत एवं उत्तानपाद मनुपुत्र थे। वह मन्वन्तर उन्हीं दोनोंके बेटों, पोतों और दौहित्रोंके वंशसे छा गया॥ ८-९॥

यह अर्थ श्लोक 8–9 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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