॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.1.9
priyavratottānapādau manuputrau mahaujasau|
tatputrapautranaptṝṇāmanuvṛttaṃ tadantaram|| 9
अर्थ
ये ही स्वायम्भुव मन्वन्तरमें ‘तुषित’ नामके देवता हुए। उस मन्वन्तरमें मरीचि आदि सप्तर्षि थे, भगवान् यज्ञ ही देवताओंके अधीश्वर इन्द्र थे और महान् प्रभावशाली प्रियव्रत एवं उत्तानपाद मनुपुत्र थे। वह मन्वन्तर उन्हीं दोनोंके बेटों, पोतों और दौहित्रोंके वंशसे छा गया॥ ८-९॥
टिप्पणियाँ
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प्रा० पा०—यद०।