श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.1.9

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

प्रियव्रतोत्तानपादौ मनुपुत्रौ महौजसौ।

तत्पुत्रपौत्रनप्तॄणामनुवृत्तं त१दन्तरम्॥ ९✎ 1016

priyavratottānapādau manuputrau mahaujasau|

tatputrapautranaptṝṇāmanuvṛttaṃ tadantaram|| 9

अर्थ

ये ही स्वायम्भुव मन्वन्तरमें ‘तुषित’ नामके देवता हुए। उस मन्वन्तरमें मरीचि आदि सप्तर्षि थे, भगवान् यज्ञ ही देवताओंके अधीश्‍वर इन्द्र थे और महान् प्रभावशाली प्रियव्रत एवं उत्तानपाद मनुपुत्र थे। वह मन्वन्तर उन्हीं दोनोंके बेटों, पोतों और दौहित्रोंके वंशसे छा गया॥ ८-९॥

यह अर्थ श्लोक 8–9 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—यद०।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 406)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1016 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): तत्पुत्रपौत्रनप्तृणामनुवृत्तं → तत्पुत्रपौत्रनप्तॄणामनुवृत्तं

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