श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.1.10

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

देवहूतिमदात्तात कर्दमायात्मजां मनुः।

तत्सम्बन्धि श्रुतप्रायं भवता गदतो मम॥ १०

devahūtimadāttāta kardamāyātmajāṃ manuḥ|

tatsambandhi śrutaprāyaṃ bhavatā gadato mama|| 10

अर्थ

प्यारे विदुरजी! मनुजीने अपनी दूसरी कन्या देवहूति कर्दमजीको ब्याही थी। उसके सम्बन्धकी प्रायः सभी बातें तुम मुझसे सुन चुके हो॥ १०॥ भगवान् मनुने अपनी तीसरी कन्या प्रसूतिका विवाह ब्रह्माजीके पुत्र दक्षप्रजापतिसे किया था; उसकी विशाल वंशपरम्परा तो सारी त्रिलोकीमें फैली हुई है॥ ११॥

यह व्याख्या श्लोक 4.1.10 से 4.1.11 तककी एक साथ है।

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