॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.10.24
ववृषू रुधिरौघासृक्पूयविण्मूत्रमेदसः।
निपेतुर्गगनादस्य कबन्धान्यग्रतोऽनघ॥ २४
vavṛṣū rudhiraughāsṛkpūyaviṇmūtramedasaḥ|
nipeturgaganādasya kabandhānyagrato'nagha|| 24
अर्थ
निष्पाप विदुरजी! उन बादलोंसे खून, कफ, पीब, विष्ठा, मूत्र एवं चर्बीकी वर्षा होने लगी और ध्रुवजीके आगे आकाशसे बहुत-से धड़ गिरने लगे॥ २४॥