फिर आकाशमें एक पर्वत दिखायी दिया और सभी दिशाओंमें पत्थरोंकी वर्षाके साथ गदा, परिघ, तलवार और मूसल गिरने लगे॥ २५॥
ततः खेऽदृश्यत गिरिर्निपेतुः सर्वतोदिशम्।
गदापरिघनिस्त्रिंशमुसलाः साश्मवर्षिणः॥ २५
फिर आकाशमें एक पर्वत दिखायी दिया और सभी दिशाओंमें पत्थरोंकी वर्षाके साथ गदा, परिघ, तलवार और मूसल गिरने लगे॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.10.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 463) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/10/25/