मुनियोंने कहा—उत्तानपादनन्दन ध्रुव! शरणागत-भयभंजन शार्ङ्गपाणि भगवान् नारायण तुम्हारे शत्रुओंका संहार करें। भगवान्का तो नाम ही ऐसा है, जिसके सुनने और कीर्तन करनेमात्रसे मनुष्य दुस्तर मृत्युके मुखसे अनायास ही बच जाता है॥ ३०॥
औत्तानपादे भगवांस्तव शार्ङ्गधन्वा
देवः क्षिणोत्ववनतार्तिहरो विपक्षान्।
यन्नामधेयमभिधाय निशम्य चाद्धा
लोकोऽञ्जसा तरति दुस्तरमंग मृत्युम्॥ ३०
मुनियोंने कहा—उत्तानपादनन्दन ध्रुव! शरणागत-भयभंजन शार्ङ्गपाणि भगवान् नारायण तुम्हारे शत्रुओंका संहार करें। भगवान्का तो नाम ही ऐसा है, जिसके सुनने और कीर्तन करनेमात्रसे मनुष्य दुस्तर मृत्युके मुखसे अनायास ही बच जाता है॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.10.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 463) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/10/30/