श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.11.14

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

सम्प्रसन्‍ने भगवति पुरुषः प्राकृतैर्गुणैः।

विमुक्तो जीवनिर्मुक्तो ब्रह्म निर्वाणमृच्छति॥ १४

samprasanne bhagavati puruṣaḥ prākṛtairguṇaiḥ|

vimukto jīvanirmukto brahma nirvāṇamṛcchati|| 14

अर्थ

और प्रभुके प्रसन्‍न हो जानेपर पुरुष प्राकृत गुण एवं उनके कार्यरूप लिंगशरीरसे छूटकर परमानन्दस्वरूप ब्रह्मपद प्राप्त कर लेता है॥ १४॥

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