और प्रभुके प्रसन्न हो जानेपर पुरुष प्राकृत गुण एवं उनके कार्यरूप लिंगशरीरसे छूटकर परमानन्दस्वरूप ब्रह्मपद प्राप्त कर लेता है॥ १४॥
सम्प्रसन्ने भगवति पुरुषः प्राकृतैर्गुणैः।
विमुक्तो जीवनिर्मुक्तो ब्रह्म निर्वाणमृच्छति॥ १४
और प्रभुके प्रसन्न हो जानेपर पुरुष प्राकृत गुण एवं उनके कार्यरूप लिंगशरीरसे छूटकर परमानन्दस्वरूप ब्रह्मपद प्राप्त कर लेता है॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.11.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 465) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/11/14/