श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.11.13

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

तितिक्षया करुणया मैत्र्या चाखिलजन्तुषु।

समत्वेन च सर्वात्मा भगवान् सम्प्रसीदति॥ १३

titikṣayā karuṇayā maitryā cākhilajantuṣu|

samatvena ca sarvātmā bhagavān samprasīdati|| 13

अर्थ

सर्वात्मा श्रीहरि तो अपनेसे बड़े पुरुषोंके प्रति सहनशीलता, छोटोंके प्रति दया, बराबरवालोंके साथ मित्रता और समस्त जीवोंके साथ समताका बर्ताव करनेसे ही प्रसन्‍न होते हैं॥ १३॥

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