॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.13.10
जडान्धबधिरोन्मत्तमूकाकृतिरतन्मतिः ।
लक्षितः पथि बालानां प्रशान्तार्चिरिवानलः॥ १०
jaḍāndhabadhironmattamūkākṛtiratanmatiḥ |
lakṣitaḥ pathi bālānāṃ praśāntārcirivānalaḥ|| 10
अर्थ
वह अज्ञानियोंको रास्ते आदि साधारण स्थानोंमें बिना लपटकी आगके समान मूर्ख, अंधा, बहिरा, पागल अथवा गूँगा-सा प्रतीत होता था—वास्तवमें ऐसा था नहीं॥ १०॥