॥ श्रीहरिः ॥
मत्वा तं जडमुन्मत्तं कुलवृद्धाः समन्त्रिणः।
वत्सरं भूपतिं चक्रुर्यवीयांसं भ्रमेः सुतम्॥ ११
matvā taṃ jaḍamunmattaṃ kulavṛddhāḥ samantriṇaḥ|
vatsaraṃ bhūpatiṃ cakruryavīyāṃsaṃ bhrameḥ sutam|| 11
अर्थ
इसलिये कुलके बड़े-बूढ़े तथा मन्त्रियोंने उसे मूर्ख और पागल समझकर उसके छोटे भाई भ्रमिपुत्र वत्सरको राजा बनाया॥ ११॥
मत्वा तं जडमुन्मत्तं कुलवृद्धाः समन्त्रिणः।
वत्सरं भूपतिं चक्रुर्यवीयांसं भ्रमेः सुतम्॥ ११
इसलिये कुलके बड़े-बूढ़े तथा मन्त्रियोंने उसे मूर्ख और पागल समझकर उसके छोटे भाई भ्रमिपुत्र वत्सरको राजा बनाया॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.13.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 474) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/13/11/