श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.13.28

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

न विदामेह देवानां हेलनं वयमण्वपि।

यन्‍न गृह्णन्ति भागान् स्वान् ये देवाः कर्मसाक्षिणः॥ २८

na vidāmeha devānāṃ helanaṃ vayamaṇvapi|

yanna gṛhṇanti bhāgān svān ye devāḥ karmasākṣiṇaḥ|| 28

अर्थ

हमें ऐसी कोई बात नहीं दीखती कि इस यज्ञमें देवताओंका किंचित् भी तिरस्कार हुआ है—फिर भी कर्माध्यक्ष देवतालोग क्यों अपना भाग नहीं ले रहे हैं?’॥ २८॥

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