हम जानते हैं आपकी होम-सामग्री दूषित नहीं है; आपने उसे बड़ी श्रद्धासे जुटाया है तथा वेदमन्त्र भी किसी प्रकार बलहीन नहीं हैं; क्योंकि उनका प्रयोग करनेवाले ऋत्विज्गण याजकोचित सभी नियमोंका पूर्णतया पालन करते हैं॥ २७॥
राजन् हवींष्यदुष्टानि श्रद्धयाऽऽसादितानि ते।
छन्दांस्ययातयामानि योजितानि धृतव्रतैः॥ २७
हम जानते हैं आपकी होम-सामग्री दूषित नहीं है; आपने उसे बड़ी श्रद्धासे जुटाया है तथा वेदमन्त्र भी किसी प्रकार बलहीन नहीं हैं; क्योंकि उनका प्रयोग करनेवाले ऋत्विज्गण याजकोचित सभी नियमोंका पूर्णतया पालन करते हैं॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.13.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 475) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/13/27/