उदारबुद्धि राजा अंगने याजकोंकी अनुमतिसे अपनी अंजलिमें वह खीर ले ली और उसे स्वयं सूँघकर प्रसन्नतापूर्वक अपनी पत्नीको दे दिया॥ ३७॥
स विप्रानुमतो राजा गृहीत्वाञ्जलिनौदनम्।
अवघ्राय मुदा युक्तः प्रादात्पत्न्या उदारधीः॥ ३७
उदारबुद्धि राजा अंगने याजकोंकी अनुमतिसे अपनी अंजलिमें वह खीर ले ली और उसे स्वयं सूँघकर प्रसन्नतापूर्वक अपनी पत्नीको दे दिया॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.13.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 476) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/13/37/