पुत्रहीना रानीने वह पुत्र प्रदायिनी खीर खाकर अपने पतिके सहवाससे गर्भ धारण किया। उससे यथासमय उसके एक पुत्र हुआ॥ ३८॥
सा तत्पुंसवनं राज्ञी प्राश्य वै पत्युरादधे।
गर्भं काल उपावृत्ते कुमारं सुषुवेऽप्रजा॥ ३८
पुत्रहीना रानीने वह पुत्र प्रदायिनी खीर खाकर अपने पतिके सहवाससे गर्भ धारण किया। उससे यथासमय उसके एक पुत्र हुआ॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.13.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 476) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/13/38/