वह बालक बाल्यावस्थासे ही अधर्मके वंशमें उत्पन्न हुए अपने नाना मृत्युका अनुगामी था (सुनीथा मृत्युकी ही पुत्री थी); इसलिये वह भी अधार्मिक ही हुआ॥ ३९॥
स बाल एव पुरुषो मातामहमनुव्रतः।
अधर्मांशोद्भवं मृत्युं तेनाभवदधार्मिकः॥ ३९
वह बालक बाल्यावस्थासे ही अधर्मके वंशमें उत्पन्न हुए अपने नाना मृत्युका अनुगामी था (सुनीथा मृत्युकी ही पुत्री थी); इसलिये वह भी अधार्मिक ही हुआ॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.13.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 476) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/13/39/