श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.13.39

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

स बाल एव पुरुषो मातामहमनुव्रतः।

अधर्मांशोद्भवं मृत्युं तेनाभवदधार्मिकः॥ ३९

sa bāla eva puruṣo mātāmahamanuvrataḥ|

adharmāṃśodbhavaṃ mṛtyuṃ tenābhavadadhārmikaḥ|| 39

अर्थ

वह बालक बाल्यावस्थासे ही अधर्मके वंशमें उत्पन्‍न हुए अपने नाना मृत्युका अनुगामी था (सुनीथा मृत्युकी ही पुत्री थी); इसलिये वह भी अधार्मिक ही हुआ॥ ३९॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें