सुनीथाकी कोखसे उत्पन्न हुआ यह वेन स्वभावसे ही दुष्ट है। परन्तु साँपको दूध पिलानेके समान इसको पालना, पालनेवालोंके लिये अनर्थका कारण हो गया॥ १०॥✎ 1602
अहेरिव पयःपोषः पोषकस्याप्यनर्थभृत्।
वेनः प्रकृत्यैव खलः सुनीथागर्भसम्भवः॥ १०
सुनीथाकी कोखसे उत्पन्न हुआ यह वेन स्वभावसे ही दुष्ट है। परन्तु साँपको दूध पिलानेके समान इसको पालना, पालनेवालोंके लिये अनर्थका कारण हो गया॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.14.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 479) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/14/10/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)