श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.14.20

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

तस्मिंस्तुष्टे किमप्राप्यं जगतामीश्‍वरेश्‍वरे।

लोकाः सपाला ह्येतस्मै हरन्ति बलिमादृताः॥ २०

tasmiṃstuṣṭe kimaprāpyaṃ jagatāmīśvareśvare|

lokāḥ sapālā hyetasmai haranti balimādṛtāḥ|| 20

अर्थ

भगवान् ब्रह्मादि जगदीश्‍वरोंके भी ईश्‍वर हैं, उनके प्रसन्‍न होनेपर कोई भी वस्तु दुर्लभ नहीं रह जाती। तभी तो इन्द्रादि लोकपालोंके सहित समस्त लोक उन्हें बड़े आदरसे पूजोपहार समर्पण करते हैं॥ २०॥

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