baliṃ ca mahyaṃ harata matto'nyaḥ ko'grabhuk pumān|| 28
अर्थ
इसलिये ब्राह्मणो! तुम मत्सरता छोड़कर अपने सभी कर्मोंद्वारा एक मेरा ही पूजन करो और मुझीको बलि समर्पण करो। भला मेरे सिवा और कौन अग्रपूजाका अधिकारी हो सकता है॥ २८॥
तस्मान्मां कर्मभिर्विप्रा यजध्वं गतमत्सराः।
बलिं च मह्यं हरत मत्तोऽन्यः कोऽग्रभुक् पुमान्॥ २८
इसलिये ब्राह्मणो! तुम मत्सरता छोड़कर अपने सभी कर्मोंद्वारा एक मेरा ही पूजन करो और मुझीको बलि समर्पण करो। भला मेरे सिवा और कौन अग्रपूजाका अधिकारी हो सकता है॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.14.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 480) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/14/28/