‘मार डालो! इस स्वभावसे ही दुष्ट पापीको मार डालो! यह यदि जीता रह गया तो कुछ ही दिनोंमें संसारको अवश्य भस्म कर डालेगा॥ ३१॥✎ 3881603
हन्यतां हन्यतामेष पापः प्रकृतिदारुणः।
जीवञ्जगदसावाशु कुरुते भस्मसाद् ध्रुवम्॥ ३१
‘मार डालो! इस स्वभावसे ही दुष्ट पापीको मार डालो! यह यदि जीता रह गया तो कुछ ही दिनोंमें संसारको अवश्य भस्म कर डालेगा॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.14.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 481) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/14/31/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#388 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीविष्णुभगवान् की → श्रीविष्णुभगवान्की